मुझे नहीं पता क्यों पर हमेशा ऐसा लगता है कि मेरे सारे दोस्त अलग-अलग जगहों पर हैं, उनके घर बन रहे हैं, और मैं अपने छोटे से फ्लैट में रोज़ वही पुराना सैलरी चेक देख रहा हूँ — समझ नहीं आता यार, matlab samjho na, जो मैं कर रहा हूँ वो कुछ नहीं है.
life is hard yaar, jab dekhoon sab log travel kar rahe hain, aur main bas अपने छोटे से अपार्टमेंट में फंसा हूँ, थोड़ा सा पढ़ता हूँ और सोचता हूँ कि मैं क्या कर रहा हूँ, motivation नहीं है, बस वही boring routine, कभी कभी तो लगता है कभी कुछ नहीं कर पाऊंगा.
यह सोचकर घबरा रहा था कि कुछ भी अच्छा नहीं होगा और सब बुरा हो जाएगा, पर फिर से सबकुछ सही हो गया। अब जब मुझे उनकी आँखों में वह दया नहीं दिखती, तो लगता है कि कहीं ना कहीं हम जीत गए हैं, जैसे कोई समझता नहीं, पर सब ठीक है, यार, समझते नहीं...
यह सोचकर घबरा रहा था कि कुछ भी अच्छा नहीं होगा और सब बुरा हो जाएगा, पर फिर से सबकुछ सही हो गया। अब जब मुझे उनकी आँखों में वह दया नहीं दिखती, तो लगता है कि कहीं ना कहीं हम जीत गए हैं, जैसे कोई समझता नहीं, पर सब ठीक है, यार, समझते नहीं...
so last week i ordered tacos and they handed me the bag with a big grin like it was some treasure but when i opened it it was just like a pile of cold lettuce and a single tortilla. and the worst part is i stood there staring like maybe if i blinked it would change or something and people were looking at me like what is this dude doing