घर वाले समझते नहीं, कभी-कभी सोचता हूँ कि क्या किया था मैंने जो हर दिन ये pity भरी आँखें देखता हूँ।
मुझे नहीं पता क्यों पर हमेशा ऐसा लगता है कि मेरे सारे दोस्त अलग-अलग जगहों पर हैं, उनके घर बन रहे हैं, और मैं अपने छोटे से फ्लैट में रोज़ वही पुराना सैलरी चेक देख रहा हूँ — समझ नहीं आता यार, matlab samjho na, जो मैं कर रहा हूँ वो कुछ नहीं है.
life is hard yaar, jab dekhoon sab log travel kar rahe hain, aur main bas अपने छोटे से अपार्टमेंट में फंसा हूँ, थोड़ा सा पढ़ता हूँ और सोचता हूँ कि मैं क्या कर रहा हूँ, motivation नहीं है, बस वही boring routine, कभी कभी तो लगता है कभी कुछ नहीं कर पाऊंगा.
life is hard yaar, jab dekhoon sab log travel kar rahe hain, aur main bas अपने छोटे से अपार्टमेंट में फंसा हूँ, थोड़ा सा पढ़ता हूँ और सोचता हूँ कि मैं क्या कर रहा हूँ, motivation नहीं है, बस वही boring routine, कभी कभी तो लगता है कभी कुछ नहीं कर पाऊंगा.
यह सोचकर घबरा रहा था कि कुछ भी अच्छा नहीं होगा और सब बुरा हो जाएगा, पर फिर से सबकुछ सही हो गया। अब जब मुझे उनकी आँखों में वह दया नहीं दिखती, तो लगता है कि कहीं ना कहीं हम जीत गए हैं, जैसे कोई समझता नहीं, पर सब ठीक है, यार, समझते नहीं...