yaar, matlab samjho na, dekhte dekhte sab log aage badh gaye hain aur main toh yahan apne chhote se apartment mein akeli apne naam ka pata nahi kar pa rahi, roz naya naya kaam karti hoon par kisi ko toh nahi pata, समझते नहीं वो लोग जिन्हें सब kuch आसानी से मिल गया
कभी कभी सोचती हूँ कि परिवार की इज्जत की बात करते हुए, क्यों मैं चुप रही जब मैंने वो सब सहा। घर वाले समझते नहीं, लेकिन वो यादें हर रोज़ मेरे साथ हैं।
जाने दो यार, घर में बस एक पुराना पंखा चल रहा है और वो भी आवाज़ कर रहा है, वो और ये महंगी बिजली का बिल - सोचा था कोई खास मिलने आया है, पर वो बस मेरी बकवास सुनने के लिए था - ये रोटी भी नहीं लाऊंगी तो क्या कोई समझेगा?
जाने दो यार, घर में बस एक पुराना पंखा चल रहा है और वो भी आवाज़ कर रहा है, वो और ये महंगी बिजली का बिल - सोचा था कोई खास मिलने आया है, पर वो बस मेरी बकवास सुनने के लिए था - ये रोटी भी नहीं लाऊंगी तो क्या कोई समझेगा?
so i finally tried making homemade pasta and let me tell you, it was a total disaster. the dough was too sticky, ended up throwing flour everywhere, and now my kitchen looks like a crime scene, like why do i even bother.