woke up this morning thinking about how i used to have a favorite pen for journaling but now i dont even know where it is and it feels like everything i wrote in that journal just vanished with it, like that was my last connection to a me that felt whole and now all i have is an empty page and my phone with no names in it to call.
घर वाले समझते नहीं कि मेरी दो बेटियों का होना ही मेरा सबसे बड़ा achievement है, और ये सुनते हुए कि कोई "आदमी" नहीं पैदा कर सकी, literally दिल तोड़ देता है, यार, इस बीच मेरी दोस्त पिछले महीने ही दुबई घूमकर आई और उसकी हर बात से ऐसा लगता है कि मैं literally यहाँ पर stuck हूँ।
बैठा था ज़ोर से कुछ कहने की कोशिश कर रहा था, और फोटोज़ शेयर कर रहा था अजनबियों के ग्रुप में, सोचा था अपने बास से बतिया रहा हूँ, सब हँस रहे थे और मैंने गलती से "आपके पेंट के दाग" लिखा, ऐसा पसीना आया कि पूरे दिन भूल नहीं पाया.
बैठा था ज़ोर से कुछ कहने की कोशिश कर रहा था, और फोटोज़ शेयर कर रहा था अजनबियों के ग्रुप में, सोचा था अपने बास से बतिया रहा हूँ, सब हँस रहे थे और मैंने गलती से "आपके पेंट के दाग" लिखा, ऐसा पसीना आया कि पूरे दिन भूल नहीं पाया.
कोई समझता नहीं, ऐसा लगता है कि मैं अपना पूरा दिन लोगों के नामों को स्क्रॉल करते हुए बिता रहा हूँ, लेकिन दिल में एक खालीपन है जो कभी भरता नहीं।