WhisperDog

Rants: घर वाले समझते नहीं, जब मैं अपनी लड़कियों के लिए सोचती हूँ और वो कहते हैं कि मैं …

literally just had to listen to a colleague make the same tired jokes about our caste dynamics, yaar, matlab samjho na, I thought we were done with this in 2023 but कोई समझتا نہیں

yaar, matlab samjho na, mein roz meri छोटे कमरे में बैठा होता hun aur मेरे दोस्त ऐसे नई नौकरी के बारे में बात करते हैं जिनसे उन्हें अच्छे पैसे मिलते हैं, लेकिन मैं बस यही सोचता हूँ कि मेरी लिप्स्टिक का रंग अभी भी गलत है, कोई समझता नहीं।

घर वाले समझते नहीं, जब मैं अपनी लड़कियों के लिए सोचती हूँ और वो कहते हैं कि मैं एक लड़का क्यों नहीं पैदा कर सकती। रिटायरमेंट तक पेंसन बचाने के लिए काम करते हैं और मेरे लिए बस इन्जीनियरिंग का नाम लिखा है, जॉब करते हुए कभी अपनी ख़ुशियाँ भी नहीं होती।

घर वाले समझते नहीं, जब मैं अपनी लड़कियों के लिए सोचती हूँ और वो कहते हैं कि मैं एक लड़का क्यों नहीं पैदा कर सकती। रिटायरमेंट तक पेंसन बचाने के लिए काम करते हैं और मेरे लिए बस इन्जीनियरिंग का नाम लिखा है, जॉब करते हुए कभी अपनी ख़ुशियाँ भी नहीं होती।

life is so bizarre yaar, ek taraf meri degree ki EMI 40 hazaar hai, doosri taraf job mil nahi rahi, visa ka time bhi khatam hone wala hai, matlab ghar wale soch rahe hain mujhe foreign career ki raahon mein ghoomta dekhke par koi samajhta nahi ke frustration ki bhi ek limit hoti hai...