WhisperDog

Rants: कल रात अपनी पेंटिंग्स देख रहा था और सोच रहा था, ये सभी कितनी अच्छी थीं। लेकिन जब…

हर दिन ऑफिस में देखता हूँ कि कैसे सब लोग आगे बढ़ रहे हैं, जबकि मुझे कोई नहीं बुलाता लंच पर, सैलरी वही है और वो प्रमोशन्स जो कभी पास थे अब ख्वाब बन गए हैं। घर में बस यही बातें सोचते हुए एक कप चाय लेकर बैठता हूँ, वो जो रिश्ते हैं, वो अब पुख्ता नहीं रहे।

i keep staring at the box of old postcards from places i never went to, and it just hits different now, you know? like all those dreams faded to dust and nobody to share the moments that could have been but never were.

कल रात अपनी पेंटिंग्स देख रहा था और सोच रहा था, ये सभी कितनी अच्छी थीं। लेकिन जब सारा सामान बिखरा पड़ा है, सोचता हूँ क्या मैं फिर से शुरू कर पाऊंगा या ये बस एक खोई हुई ख्वाब बन के रह जाएगा।

कल रात अपनी पेंटिंग्स देख रहा था और सोच रहा था, ये सभी कितनी अच्छी थीं। लेकिन जब सारा सामान बिखरा पड़ा है, सोचता हूँ क्या मैं फिर से शुरू कर पाऊंगा या ये बस एक खोई हुई ख्वाब बन के रह जाएगा।

yaar, honestly, i worked so hard for everyone else to have a chance and now i just sit here unable to even read the letters that make up my own name, कभी समझ नहीं आया कि ये किसके लिए किया. कभी कभी सोचता हूँ, क्या ये सब सच में worth था?