WhisperDog

General: घर वाले समझते नहीं, हर बार जब उस प्यारे जीन्स में घुसती हूँ, खुद को सुपरमैन से क…

बस यह सोचता हूं कि जब से काम पर मेरी जाति का पता चला, ग्रुप लंच के लिए कभी कोई इन्बिटेशन नहीं आया और प्रमोशन तो एक ख्वाब सा बन गया है, सब जैसे अचानक खो गए हैं, फिर से वही कहानी।

delivering late night orders feels like being a ghost. everyone sees you but no one cares, just another app buzzing for their late night snacks while i barely get a moment to breathe.

घर वाले समझते नहीं, हर बार जब उस प्यारे जीन्स में घुसती हूँ, खुद को सुपरमैन से कम नहीं समझती - और बस झुकने पर वह बटन एकदम से उड़ जाता है। ये लोग मुझसे ऐसा बर्ताव करते हैं जैसे मैं किसी अंतरिक्ष के राजदूत की तरह महंगी हूं - जब बस अटका हुआ बटन ही मेरे लिए ये पूरे प्यार की कीमत बता रहा है।

घर वाले समझते नहीं, हर बार जब उस प्यारे जीन्स में घुसती हूँ, खुद को सुपरमैन से कम नहीं समझती - और बस झुकने पर वह बटन एकदम से उड़ जाता है। ये लोग मुझसे ऐसा बर्ताव करते हैं जैसे मैं किसी अंतरिक्ष के राजदूत की तरह महंगी हूं - जब बस अटका हुआ बटन ही मेरे लिए ये पूरे प्यार की कीमत बता रहा है।

iran’s rouhani thinks he can play tough with america, but the only thing he’s really proving is that he’s all talk and no guts! with explosions rattling tehran, does he really believe he can scare trump?