WhisperDog

Confessions: यार, एक बार तो मेरे एक दोस्त ने मेरी पसंदीदा चाय की दुकान के सामने कैफे में सारा…

جب میں نے پہلی بار اپنی ماں کی بیماری کے بارے میں سنا تو سوچا نہیں تھا کہ اس درد سے بھری راتوں میں اتنا کچھ سامنے آ جائے گا کہ میری آنکھیں ہر چھوٹی چیز کو پکڑ لیں گی اور اب یادوں میں سہم جائے گی جیسے اس کو چھوڑ کر کبھی کہیں جانا ہی نہیں ہے۔

yaar, matlab samjho na, just spent the whole day sorting out a “free” government program and somehow ended up with a voucher for a coconut water subscription, like seriously, kahan se kya mila? घर वाले समझते नहीं, ab toh sirf chidiya ka naam hi yaad hai.

यार, एक बार तो मेरे एक दोस्त ने मेरी पसंदीदा चाय की दुकान के सामने कैफे में सारा दिन बैठके photos खींचें और मुझे नहीं बुलाया, पता नहीं क्यों - जो मेने देखा सबकुछ boring था, बस लगता है कि ये मेरी सजा है। अब, अरे क्यों, कोई समझता नहीं, मैं भी क्यों हर बार अकेले बैटके यही चाय पीने आया हूँ।

यार, एक बार तो मेरे एक दोस्त ने मेरी पसंदीदा चाय की दुकान के सामने कैफे में सारा दिन बैठके photos खींचें और मुझे नहीं बुलाया, पता नहीं क्यों - जो मेने देखा सबकुछ boring था, बस लगता है कि ये मेरी सजा है। अब, अरे क्यों, कोई समझता नहीं, मैं भी क्यों हर बार अकेले बैटके यही चाय पीने आया हूँ।

i miss the way it felt to be understood by just a glance, now i see people looking at me like a puzzle they don’t want to solve. it feels like i traded my home for silence and an accent that screams stranger.